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Immune system

आज सम्पूर्ण  जगत  कोरोना वायरस से ग्रसित है और इसका अभी तक कोई सटीक दवा नहीं बन पाई है केवल बचाव ही एक मात्र उपाय है। सरकार और डॉक्टरों की ओर से यही कहा जा रहा  है कि घर में ही रहें, सामाजिक दूरी बनाए रखें , अपने हांथों को लगातार  साबुन या अल्कोहलिक द्रव से धोते रहें, हांथ से अपने आंख नाक कान को स्पर्श करने से बचें और सबसे महत्वपूर्ण अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता  को मजबूत बनाए / बनाने का हर संभव प्रयास करें। आइए जानने का प्रयास करते हैं कि रोग प्रतिरोधक तंत्र (Immune system) क्या है ? , किस प्रकार कार्य करता है, किन कारणों से  कमजोर (weeks) होता है और किन - किन उपायों से मजबूत (strong) होता है। जैसा कि हमारा शरीर विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं (cells) , ऊतकों (tissues) और अंगों (organs) से बना है उसी प्रकार रोग प्रतिरोधक तंत्र (immune system) हमारे शरीर के कोशिकाओं (cells), ऊतकों (tissues)और अंगों (organs) का एक सम्मिश्र जाल (complex Network) है जो सामूहिक रूप से कीटाणुओं और रोगाणुओं से शरीर की सुरक्षा करता है अर्थात् रोग प्रतिरोधक तंत्र (immune sys...

संगरोध ( Quarantine ) का आरंभ

संगरोध (Quarantine) शब्द का इस्तेमाल मानव जाति कई सदियों पहले से ही करती आ रही है। संगरोध लैटिन का मूल शब्द है, जिसका मूल अर्थ चालीस है। आज से कई  शताब्दी पहले एक देश से दूसरे देशों,एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीपों के बीच यातायात का प्रमुख साधन  जलमार्ग ही था। जहाजों के द्वारा माल और यात्रियों  को लाने -  ले जाने  का काम किया जाता था । यात्रा में कई हफ्तों - महीनों का समय लगता था।इस दौरान  जलवायु और मौसम परिवर्तन के कारण यात्री  संक्रामक रोगों  के चपेट में आ जाते थे या जहाज का माल किसी संक्रामक रोगों से ग्रसित हो जाता था। संक्रामक रोगों या नाशीजीवों  के प्रसार को रोकनें के उद्देश्य से लोगों या सामान की आवाजाही और दूसरों से मिलने - जुलनें पर प्रतिबंध लगा दिया जाता था । बंदरगाह से कुछ दूर जहाज को रोक लिया जाता था और जहाज के कप्तान को  इस बात का जवाब देना पड़ता था कि यात्री और माल किसी रोग से ग्रसित नहीं हैं और गलत जानकारी देने पर दंड मिलता था। यदि जहाज में किसी यात्री के रोगी होने अथवा जहाज पर लदे माल में रोग प्रसारक कीटाणु होने का संदेह ह...

वायरस से जंग आज सम्पूर्ण विश्व एक छोटे से वायरस यानी कि corova virus disease (Covid-19) से डरी हुई है, जबकि इस वायरस का आकार मानव के बाल कि तुलना में 900 गुना छोटा है। दिसंबर 2019 में चीन देश के वुहान शहर में नोवल कोरोना वायरस का पहला मामला सम्पूर्ण विश्व के सामने जानकारी में आया। डाक्टरों का मानना है कि इसके लक्षण सार्स से काफी मिलते जुलते है और ' नोवल कोरोना वायरस ' कोरोना वायरस परिवार का सातवां वायरस है अभी तक छ: तरह के कोरोना वायरस सामने आए हैं । इनकी संरचना 80 फ़ीसदी तक चमगादडों में पाए जाने वाले सार्स वायरस जैसी मिली है।इस वायरस ने सम्पूर्ण जगत में इस प्रकार तबाही मचाई की विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) को महामारी (Pandemic) घोषित करना पडा। इस वायरस के संपर्क में आने से किसी व्यक्ति में उसके प्रतिरक्षा क्षमता (Imminity power) के अनुसार 14 दिनों के बाद तेज बुखार, कप और सूखी खांसी, शास लेने में समस्या, फ्लू कोल्ड में से लक्षण , डायरिया और उल्टी में से कोई भी दिख सकते है। उस व्यक्ति में प्रतिरक्षा क्षमता ज्यादा होने से 14 दिनों के बाद भी लक्षण दिखाई नहीं देते , किन्तु उस व्यक्ति के संपर्क में अन्य व्यक्तियों में यह वायरस फैलता है। किसी पदार्थ या धातु में यह वायरस 12 से 14 घंटे तक रहता है इसके बाद यह नष्ट हो जाता है लेकिन इस दौरान धातु के संपर्क में आने से किसी भी व्यक्ति के संक्रमित होने की संभावना बनी रहती है । इस वायरस के चपेट में बुजुर्गों (60 से ऊपर उम्र ) के ज्यादा आने की संभावना बताई जा रही है। इस वायरस से मानव जीवन को बचाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन और सभी देशों की स्वास्थ्य संस्थाओं ने एक नियमावली जारी की जैसे हांथो को लगातार साबुन से धोना, अल्कोहल आधारित हैंड रब का इस्तेमाल करना, खांसते और छीकते समय नाक और मुंह को रुमाल या टिशू पेपर से ढंक कर रखें, जिन लोगों में फ्लू और कोल्ड के लक्षण हों उनसे दूरी बनाकर रखें इत्यादि। विशेषज्ञों द्वारा इस महामारी को फैलाने से रोकने में सामाजिक दूरी (Social distenting) की अहम भूमिका बताई जा रही है, इसीलिए सभी संक्रमित देश अपने राज्यों में लॉकडाउन किया है। सामने आर्थिक मंदी का बिकराल संकट होने के बावजूद विश्व के सभी देश 'जान है तो जहान है ' को परिलक्षित करनें में लगे हुए हैं। सभी देशों ने अपनी सीमाएं बंद कर दी हैं। सभी देशों में अंतरराष्ट्रीय उड़ान पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऎसा लगता है कि गांव , तहसील, जिला, राज्य और देश ठहर से गए हैं। इस महामारी के तीन माह से ज्यादा समय हो जाने के बाद भी विश्व के महान डॉक्टरों का यही कहना है कि ' बचाव ही एक मात्र रास्ता है। ' इसीलिए हम सभी को शासन के निर्देशों का पालन करते हुए संकल्प और संयम के साथ इस भयावह वायरस से जंग जारी रखनी है। कवि मैथिलीशरण गुप्त ने कहा है कि आशा से आकाश थमा है………इसलिए हम सभी को आशा करनी चाहिए कि मानव जाति एक दिन इस महामारी (covid-19) के साथ जंग में विजय प्राप्त करेगी। डॉ. जय प्रकाश पटेल सहायक प्राध्यापक, विषय-गणित, मध्यांचल प्रोफेसनल विश्वविद्यालय, भोपाल (म.प्र.)